Tuesday, May 11, 2010

I am afraid of .....


People say they luv the rain but take an umbrella when it rains,
People say that they luv the wind but close the windows when it blows,
People say that they luv the sun but stay indoors when the sun shines,
So I am afraid of all the people who say that they love me.

she comes ...dances wid me in d rain....sings wid me in the wind and so love me

Tuesday, May 4, 2010

AUR BATAO........:-)











Conversation between 2 software engg. Friends:


.SE1---hello

.SE2---hi

.SE1---hey h r u???

.SE2---m fine!!! Wht abt u???

.
SE1---m fine too.

.SE2---cool

.SE1---so howz life???

.SE2--gud

.SE1--hmmmm

.SE1--aur batao? ( passing the ball to the other side) .

SE2--hmmm everything as usual...

SE2--so wht else???

SE1--nothing much

.SE2--ok

SE2--aur batao? ( passing the ball to the other side) .

.And it goes on like this until they give up....

Are u also having such conversation's with ur frnds….

then I guess u r also suffering from "aur batao" syndrome… It means ur life is all screwed up following the usual monotonous routine.

Probably u need a change in ur life…something which is exciting… something which is adventurous…something which really makes u feel gud…

correct.....

yeh sab to thik hai.........

AUR BATAO........ :-)

Have a Gr8 Day…

Sunday, April 25, 2010

Time Magazine's quote on Sachin


"When Sachin Tendulkar travelled to Pakistan to face one of the finest bowling attacks ever assembled in cricket, Michael Schumacher was yet to race a F1 car, Lance Armstrong had never been to the Tour de France, Diego Maradona was still the captain of a world champion Argentina team, Pete Sampras had never won a Grand Slam. When Tendulkar embarked on a glorious career taming Imran and company, Roger Federer was a name unheard of; Lionel Messi was in his nappies, Usain Bolt was an unknown kid in the Jamaican backwaters. The Berlin Wall was still intact, USSR was one big, big country, Dr Manmohan Singh was yet to "open" the Nehruvian economy. It seems while Time was having his toll on every individual on the face of this planet, he excused one man. Time stands frozen in front of Sachin Tendulkar. We have had champions, we have had legends, but we have never had another Sachin Tendulkar and we never will."

Monday, April 19, 2010

Quotes...for hearts

Always be the reason of someone's happiness,Never be just a part of it. Be a part of someone's sadness, But never be the reason for it!

Friday, April 16, 2010

जाट ओर रोज डे


अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में radiology डिपार्टमेन्ट के रिपोर्टिंग रूम में टंगे ब्लेक बोर्ड पर10 साल पहले लिखी एक फिमेल रेसिडेंट की उक्ती (जहाँ जाट ने अपनी residency की थी )

जब रोज़ कमेटी हमें जुगाड़ से मिली तो सबसे पहला ऑर्डर जाट-2 ने दिया "कुछ डिसकाऊंट है ?उसने पूछा था ,कैसा डिस काउंट मेरे साथ रोज कमेटी वाली लड़की ने पूछा ?अरे वही जो बड़ी बड़ी कंपनिया देती है एक के साथ एक फ्री जैसा कुछ ? ....जाट बोला ।प्रदीप ये रोज है .....वो लड़की बोली॥ जाट ने एक साथ ढेरो पिंक रोज बुक कराये ओर कॉलेज की सारी जूनियर सीनियर खूबसूरत लड़कियों के नाम लिख कर दे दिये ..प्रगतिशील जाट था इसलिए ना धर्म ,ना जात,ना उम्र, ना कद कोई भी आडे नही आया ..फिक्स हो या " हाँ या ना" में लड़की अटकी पड़ी हो ...सबको रोज ...उनमे से एक दो लड़किया ऐसी थी जो फिक्स थी ओर खासी रौबीली थी ओर उस वक़्त हम वैसे भी थर्ड इयर में थे सो थोड़ा घबराहट भी हुई "अबे जाट वहां रहने दे 'मैंने उसे अकेले में समझाया ...क्यों पिंक रोज देने में के है ?लाल थोड़े ही ना दे रहा हूँ ? खैर हमने डरते पड़ते उसके रोज भी सारे रोज के साथ बाँट दिये ,रात को cultural evening थी ,लड़किया साडीयो ओर खूबसूरत लहंगों में ऑडिटोरियम में आती ..गजल का प्रोग्राम था ...हम एक जगह बैठे हुए थे ..अचानक वही रौबीली मोहतरमा अपने बॉय फ्रेंड के साथ दिखी ..हम थोड़ा सिमट गये....हे प्रदीप तुम्हारा रोज मिला ..थैंक्यू ..वे बोली ......तो आज से अपां दोस्त...जाट बोला था ......
कल जाट का जन्मदिन है , दोपहर बाद साडे तीन घंटे की ड्राइव के बाद उससे मिलने जा रहा हूँ..... चियर्स
15th may

मैं जाट ओर वो होस्टल -भाग दो


चूँकि कमरे मे तीन दीवारे थी ओर बाकि जगह अलमारी ने ले रखी थी ,इसलिए हमने अपनी अपनी एक एकअलमारी बाँट ली ,तीसरी अलमारी हमारे लोकल दोस्तो के लिए रिजर्व थी ,एक रोज जब मैं जोर्ज माइकल कापोस्टर खरीद कर लाया तो जाट बोला “यो कौन है “ मैंने कहा गाना गाता है ,फ़िर मैं कोई ओर पोस्टर खरीद के लायाओर उसे चिपका दिया …जाट खामोशी से देखता रहा …..कुछ हफ्तो बाद एक दिन शाम को जाट ने पलंग पे एक पोस्टर फैलाया ……ताऊ देवीलाल .. ओर उन दोनों के बीच चिपका दिया ……रात को मैंने उससे पूछा “तू ये लायाकहाँ से ? हरियाणा से मँगवाया है .
उन दिनों मेस मे अक्सर दो ही चीजे बनती थी बटाटा यानि आलू ओर पूरी ..रोज रोज के उस मेनू से दुखी होकर कईबार मेरा मन करता की चीख कर कहूँ......मुझे बटाटा नही खाना ...अक्सर हम आधा पेट उठते ओर रात को कॉलेजके पीछे लारी पे जाकर अंडे खाते ...जाट पाव ज्यादा खाता ओर अंडे कम.....जब बारिश शुरू हुई तो लोगो ने हमे चेताया की यहाँ रैन कोट खरीद लेना पर मैंने ओर जाट ने इसे हँसी मे उडा दिया .बारिश शुरू हुई ओर एक एक करकेभीगे कपड़ो का ढेर शुरू हुआ ...जाट लोबी मे से किसी का भी रैन -कोट उठा कर पहन कर चला जाता ....ओर क्लाससे बाहर निकल कर छत रियो पर एक सरसरी निगाह मारता ओर कोई पसंद की उठा कर चला आता ज्यादातर लड़कियों की होती ...बेचारी कुछ न कह पाती.. फ़िर हमारी एक दोस्त ने उसे एक छतरी गिफ्ट करदी....... .
उस साल बहुत ज्यादा बारिश हुई ,मेस बंद हो गई ओर एक सप्ताह का अवकाश ,बरोदा अहेम्दाबाद ओरनजदीक वाले लगभग घर चले गए ....महीने के आखिरी दिन थे .बैंक मे पैसे नही थे ओर मेस बंद ....जेब मे कुलजमा ५० रुपये थे ओर पूरे दो दिन काटने थे ....लंच ओर डिनर के साथ ...एक लोकल दोस्त ने लंच पे बुलाया ,मैंओर जाट खुश हुए ....सोमवार को बैंक खुल जाना था ..तब मेरे पास एक फटफटिया हुआ करती थी जिस पर उ.पका नंबर था ओर अक्सर पुलिस वाले हमे पकड़ लेते थे ओर हम २० रुपये देकर छुट जाते थे .....वैसे एक बार जाटको पकड़ लिया बोला पैसे नही है तो पुलिस वालो ने उसे वही चोराहे पे अपने पास बैठा लिया ...कुछ देर बैठने केबाद जब जाट ने पुलिस वालो की ही दो बीडी पी ली तो उन्होंने उसे छोड़ दिया.... खैर उस दिन हम खुशी खुशी लंचकरके वापस लौट रहे थे की अचानक सामने से एक ठुल्ला दिखा ओर उसने हमे थाम लिया ....मरते क्या न करतेजेब मे हाथ डाला तो ५० का नोट था ....कहाँ से तुडवाते?
मैंने उसके हाथ मे दिया ....जाट उसे कुछ देर घूरता रहाफ़िर बोला "पईसी वापस ना करने? तुम्हारा तो २० का रेट है ....पोलिस वाले ने हम दोनों को हड़का कर भगादिया.....तब किसी से उधार मांग कर हमने अगले दो दिन काटे .....

अगले साल हमारी इस सबसे बड़ी समस्या का हल हो गया कॉलेज मे resident मेस मे हम दोनों को एंट्री मिल गयी जिसको ज्यादातर नॉर्थ इंडियन ने चला रखा था ...
लेकिन जाट का i.q गजब का था ओर उसकी याददाश्त गजब की थी ....अक्सर जब हम एक्साम के दिनों मे ऊपरनीचे हो रहे होते जाट आराम से टी.वी पर क्रिकेट मैच देख रहा होता ,उसने गुजराती पढ़ना फौरन सीख लिया ओरअक्सर गुजराती के अखबार बोल बोल के पढता ....तब तक जाट ने दो ही मूवी देखी थी शोले ओर पाकीजा .....मुझेमूवी देखने का बहुत शौक है मैं पूछता .....चलेगा ...गाना कौन सा है ? वो पूछता .फ़िर मना कर देता ....एक बारजिद करके हम लड़के उसे "basic insticnt दिखाने ले गये,जाट १५ मिनुत मे मुझसे मेरी फटफटी की चाभी लेकरबाहर आ गया "अरे यो कोई पिक्चर है ? मुझे याद है जब मैंने उसे पहली बार जगजीत सुनवाया तो वो बोर होकरउठ खड़ा हुआ था ......
तब हमे एक मोहतरमा से इश्क हुआ ओर उन्हें इम्प्रेस करने के लिए हमने एक गाने की तीन दिन तक जमकररिहर्सल की .अक्सर बर्थ डे पार्टी पर हम सब किसी होटल मे मिलते ,खा पीकर वापस आ जाते ...तब हमने प्लानबनाया की कुछ देर बाद लड़के मुझसे गाने की फरमाइश करेंगे ओर फ़िर हम गाना गा कर उन्हें इम्प्रेस करदेगे....धड़कते दिल से उस रोज हम पहुंचे ...पहले २० मिनट बीत गये ....साला किसी को कुछ याद नही रहा ...कोईजिक्र नही कर रहा .....हमने एक दोस्त को इशारा किया वे नजरअंदाज कर गये .....दूसरे को फुसफुसा कर कहागाना ....गाना "....अभी रुक के उसने मुझे समझाया .......कुछ देर ओर फ़िर .....हमने सामने बैठे जाट के पैरमे लात मारी....जाट टेबल के नीचे घुस गये .....फ़िर उन्हें समझ आया .....ओर उन्होंने फरमाइश की ...हमने थोड़ानखरे दिखाये ओर फ़िर हमने रिहर्सल किया हुआ पुरा गाना सुना दिया....वो गाना था "दिए जलते है फूल खिलतेहै......"नमक हराम का गाना ......अगले दस सालो तक वो गाना हमारी लड़को की हर महफ़िल मे हर पार्टी मे बजताओर मेरे यार इसका मजा लेते.....बाद के दिनों मे हम पार्टियों के सिंगर भी हो गये ..

हमारे कॉलेज के annual function मे ओडीटोरियम का उपरी हिस्सा under -graduates के लिए रहता था ओरवाली रात उसकी हवा मे ही इतना नशा होता था की न पीने वाले भी हवा सूंघ सूंघ के बेचारे नशे मेहो जाते थे ,दरअसल ये सालो से चली आ रही परम्परा थी...उस दिन सिगेरेट की इतनी खपत थी की बाद के सालोमे हम लोगो ने ये भी सोचा की क्यों न छत से जलती हुई रस्सी टांग दी जाये क्यूंकि माचिस की बड़ी किल्लत रहतीथी एक बार किसी ने मांगी ओर फ़िर गुम..जाट की केपसिटी बहुत अच्छी थी मैंने आज तक उसे एक या बार ही चढ़ेहुए देखा है....कई लोग होस्टल से दो पैग मर कर चलते थे ....टीचर्स से डरते भी थे अपने साथ एक ऐसा बन्दा रखतेथे जो थोड़ा होश मे हो अगर गेट पर कोई कड़क या सख्त टीचर खड़ा होता तो पहले उसे गुजर जाने देते .....तो एकरोज हमारी क्लास के तीन लोकल बंदो को चढ़ गई ओर बदकिस्मती से जाट उनके साथ थे ...जब आधे घंटे तकजाट नही दिखे तो हम उन्हें ढूंढने निकले .देखा जाट एक साहेब जादे को बाहर ओडी टोरियम की दीवार से टिका रहे है की महाह्श्य गिर न पड़े ...क्या हुआ .....अबे फला बाहर गार्डन मे पड़ा है .....तू उसे देख .....मैं तीसरे को बाथरूमसे लेकर आता हूँ....हम गार्डन मे पहुंचे तो देखा वे महाशय तारो को देख रो रहे है .......क्या हुआ ? साला जाट कहाँ है मैंने उससे कहा था आज मैं उससे पर्पोज़ करके रहूंगा वो मुझे गार्डन मे छोड़ गया की उसे यही लेकर आताहै......हमने दोनों को बारी बारी से मोटर साईकिल पे अपने बीचों बीच बैठाया ओर फ़िर होस्टल के कमरे मे ले जाकर छोडा ....इन सबमे ३० मिनुट गुजर गये ...मैं ओर जाट सुस्ताने को एक सुट्टा मार ही रहे थे की जाट बोला "अबे मोंटू को तो भूल ही गये."....वाकई हम भूल ही गये थे भाग कर वह पहुंचे तो मोंटू अभी भी दीवार से टिके खड़े थे.

जाट दूसरे दोस्तो की तरह "दिल चाहता है "देखकर फोन नही करता ,न कभी देर रात पीने के बाद उसका फोन आता पर .... वो ओर।मैं साल मे दो बार तो मिलते ही है...... आज जाट इतना कमाता है की मुझसे इन्कम टैक्सबचाने के तरीके पूछता है ...उसके पास सारे लेटेस्ट गदेट्स है । उसके पास बड़ी गाड़ी है ....दो खूबसूरत बच्चे है... उसकी गाड़ी मे जगजीत की सी डी बजती है.....साल मे एक बार छुट्टी मनाने विदेश जाता है ओर जब कभी मेरामन बहुत उदास हो जाता है मैं ५ घंटे की ड्राइव करके हरियाणा पहुँच जाता हूँ...हमारी बीवीया हमसे नाराज रहती हैक्यूंकि हम दोनों जब मिलते है तो घंटो रात भर पीकर जग कर बतियाते है ....आज से ७ साल पहले जब मैंने pratice शुरू ही की थी तब अचानक किसी लाइट के default की वजह से मेरी एक लेसर मशीन को जबरदस्तनुकसान हुआ तब जेब मे इतने पैसे भी नही थे की दूसरी लूँ ,परेशान हालत मे मैंने जाट को फोन लगाया ,वो मुझसे२ साल पहले प्राइवेट प्रक्टिस मे आ गया था ...परेशां मत हो इन्सुरेंस वालो को फोन करना ....नही बात बने तो शाम को मुझे बताना ....मैं पैसे लेकर आ जाउन्गा ...ये पोस्ट लिखते लिखते सोच रहा हूँ उसे फोन कर लूँ..... .. . ... ......." ..... musical nights ?...... " ......

Tuesday, April 13, 2010

मैं जाट ओर वो होस्टल -भाग एक



उससे पहली मुलाकात सी. ऍम.ओ ऑफिस के बाहर हुई थी जहाँ हम medial चेकअप की लाइन मी खड़े थे ,चूँकिहम all india entrance examanition वाले १५ लोग थे ओर उसमे भी कुछ लोग नदारद थे इसलिए लाइन छोटीथी ,वो बाहर निकला ओर मैं लाइन मे सबसे आगे खड़ा था 'पूरे कपड़े उतरवा लेगे ' मुझे देखकर वो बोला तो आगेकी कल्पना करके मेरे होश उड़ गए ओर मेरे पीछे खड़ी लड़की तो लगभग बेहोश सी हो गई....अन्दर ओंपचारिकताभर थी.....हम बाहर निकले तो जाट मुस्करा रहा था हमने देखा हमारे बाद लड़की को लगभग घसीटते हुए उसके माँबाप अन्दर ले गये....बाद मे यही जाट हमारे रूम पार्टनर तय हुये....ओर शुरू के कुछ दिन हमे हरियाणवी भाषा केअभ्यस्त होने मे लगे ....वो अक्सर कहते "तैने बेरा है " कई दिनों बाद हमे पता चला की बेरा का मतलब "पता " यामालूम होना है ....जाट अपने हरयानवी चुटकुले सुनाता ओर उसमे कई खास लड़को वाले चुटकले होते एक बार हमलड़कियों के साथ केन्टीन बैठे हुए थे ओर जाट शुरू हुआ "एक चूहा भाजा जा रहा था ........भाजा का हरियाणवी मेमतलब भागना होता है......हम लड़के बैचैन हो उठे ......जाट क्या सुना रहा है ...कल ही तो हमे सुनाया था ॥जाट काध्यान हमने तोडा .जाट .ने अनसुना किया फ़िर शुरू हुआ "एक चूहा जंगल मे भाजा जा रहा था ".......जाट ...किसीने आवाज दी जाट ने फ़िर अनसुना कर दिया....चूहा .....जाट किसी ने आवाज दी "क्या कर रहा है ' के कर रहा हूँचुटकुला सुनाने लग रिया हूँ ." जाट लड़किया .....कोई फुसफुसाया .....अबे यो दूसरा चूहा है ............................जाटगुस्से मे खड़ा हो गया ....

गर्मी हो या सर्दी जाट गर्म पानी मे ही नहाता ,हॉस्टल के गीजर ठीक होने से पहले उसके पास अपनी एक रोड थी जिसे उसने एक लकड़ी के चारो ओर लपेट कर बनाया हुआ था ,उसे वो अक्सर बाल्टी मे डालता ओर पानी जब खौलने लगता तब जाट नहाने की बाल्टी ले कर चलता ....रोज मैं उम्मीद करता की अभी बाथरूम से उसके चीखने की आवाज आयेगी पर कभी नही आयी ....एक दिन सुबह जब वइवा की तैयारी मे मैं किताब हाथ मे लिए इधर से उधर उस कमरे मे दाल रहा था "देख पानी गर्म हुआ के ना"?जाट बोला .....मैंने पानी मे हाथ डाला ओर एक झटके से दूर जा गिरा .....जाट के ठहाका गूंज उठा ,उसके बाद मैंने कभी उसे गर्म पानी पर नही टोका ! हमारे ठीक नीचे एक मैस हुआ करती थी ओर गर्मियों मे उसकी बालकनी मे उसका महाराज अक्सर मुह खोल कर खर्राटे मार कर सोता था .जाट भाई को रात रात को बहुत लगती थी ओर वे बाथरूम से बचते हुए कई बार बालकनी से ही अपनी शंका का निवारण कर लिया करते थे .....उनकी इस आदत के कारन हम कई बार कहते की उसे prostate enlargement हो गई है........खैर उस दिन वो उठे ओर नीचे से गुजराती मे गलिया आनी शुरू हुई ओर जाट भाई अपनी चद्दर ओड के लाईट बुझा के लेट गये ओर ....हमारी कुछ समझ मे आता उससे पहले ही गेट जोर जोर से खटखटाया जाने लगा ॥हम उठे ओर दरवाजा खोला ...महाराज को जब तस्सली हुई की हमारी बालकनी से कोई कार्य नही हुआ है .....तब वे रवाना हुए ..

जाट भाई के पास एक रंगीन कम्बल हुआ करता था जिसके वे अक्सर नाराज हो जाने के बाद ओड कर लेट जाया करते ....ओर आवाजे देने पर भी अपना मुह उसमे से बाहर नही निकालते ......उन दिनों नये नये ताले फिट हुये थे जिनकी तीन चभिया दी गई थी जिसमे से एक चाभी हमारे लोकल दोस्तो के पास थी ओर उस ताले मे ये खासियत थी की आप उसकी एक क्नोब घुमा कर जोर से बंद करो तो वो लाक हो जाता था......तो एक सुबह हम आराम से उठे तो जाट गायब था हम होस्टल केन्टीन गये चाय -वाय पी वापस लौटे तो जाट कमरे मे नही था ,हम तैयार होकर कॉलेज के लिए रवाना हो गये ,पहली क्लास मे जाट नदारद .......पूरे किसी लेक्चर मे जाट नही दिखा ......ये साला जाट गया कहाँ .....उन दिनों हमारा एक घंटे का लंच ब्रेक होता .....मेस मे भी जाट नही दिखा ......शाम को हम कशमकश मे होस्टल लौटे तो जाट खाली अंडर वियर मे सुलगे हुए खड़े थे....दरअसल वो बाथरूम मे अपने कपड़े धो रहे थे नहाने के साथ साथ ओर हम ताला लगा कर चल दिए ,दूसरी चाभी अन्दर रह गई ओर पुरी लोबी मे बदकिस्मती से उस रोज कोई नही आया ......हम उस रोज आगे आगे थे ओर जाट हमारे पीछे .......कई दिनों तक वे उस कम्बल को ओडे रहे ......
जाट को अक्सर पहली नजर का प्यार होता उन्हें पहला एक मोडेर्ण गुजराती लड़की से हुआ ,दूसरा एक ठेठ गुज्रातन से ......तीसरा ६ साल बड़ी सीनियर से उसके बाद हमने गिनना छोड़ दिया .....जाट की डाइट बहुत अच्छी थी इसलिए अक्सर पार्टियों मे वो देर तक खाना खाता मिलता .....एक बार पहली बार हमारे एक लोकल दोस्त ने हमे खाने पर बुलाया जिसकी मम्मी को हिन्दी लगभग ना के बराबर आती थी,खैर पहुँचने के थोडी देर बाद गोल गप्पे मेज पर बैठा कर सर्व किए ग
ये (credit@not mine)