चूँकि कमरे मे तीन दीवारे थी ओर बाकि जगह अलमारी ने ले रखी थी ,इसलिए हमने अपनी अपनी एक एकअलमारी बाँट ली ,तीसरी अलमारी हमारे लोकल दोस्तो के लिए रिजर्व थी ,एक रोज जब मैं जोर्ज माइकल कापोस्टर खरीद कर लाया तो जाट बोला “यो कौन है “ मैंने कहा गाना गाता है ,फ़िर मैं कोई ओर पोस्टर खरीद के लायाओर उसे चिपका दिया …जाट खामोशी से देखता रहा …..कुछ हफ्तो बाद एक दिन शाम को जाट ने पलंग पे एक पोस्टर फैलाया ……ताऊ देवीलाल .. ओर उन दोनों के बीच चिपका दिया ……रात को मैंने उससे पूछा “तू ये लायाकहाँ से ? हरियाणा से मँगवाया है .
उन दिनों मेस मे अक्सर दो ही चीजे बनती थी बटाटा यानि आलू ओर पूरी ..रोज रोज के उस मेनू से दुखी होकर कईबार मेरा मन करता की चीख कर कहूँ......मुझे बटाटा नही खाना ...अक्सर हम आधा पेट उठते ओर रात को कॉलेजके पीछे लारी पे जाकर अंडे खाते ...जाट पाव ज्यादा खाता ओर अंडे कम.....जब बारिश शुरू हुई तो लोगो ने हमे चेताया की यहाँ रैन कोट खरीद लेना पर मैंने ओर जाट ने इसे हँसी मे उडा दिया .बारिश शुरू हुई ओर एक एक करकेभीगे कपड़ो का ढेर शुरू हुआ ...जाट लोबी मे से किसी का भी रैन -कोट उठा कर पहन कर चला जाता ....ओर क्लाससे बाहर निकल कर छत रियो पर एक सरसरी निगाह मारता ओर कोई पसंद की उठा कर चला आता ज्यादातर लड़कियों की होती ...बेचारी कुछ न कह पाती.. फ़िर हमारी एक दोस्त ने उसे एक छतरी गिफ्ट करदी....... .
उस साल बहुत ज्यादा बारिश हुई ,मेस बंद हो गई ओर एक सप्ताह का अवकाश ,बरोदा अहेम्दाबाद ओरनजदीक वाले लगभग घर चले गए ....महीने के आखिरी दिन थे .बैंक मे पैसे नही थे ओर मेस बंद ....जेब मे कुलजमा ५० रुपये थे ओर पूरे दो दिन काटने थे ....लंच ओर डिनर के साथ ...एक लोकल दोस्त ने लंच पे बुलाया ,मैंओर जाट खुश हुए ....सोमवार को बैंक खुल जाना था ..तब मेरे पास एक फटफटिया हुआ करती थी जिस पर उ.पका नंबर था ओर अक्सर पुलिस वाले हमे पकड़ लेते थे ओर हम २० रुपये देकर छुट जाते थे .....वैसे एक बार जाटको पकड़ लिया बोला पैसे नही है तो पुलिस वालो ने उसे वही चोराहे पे अपने पास बैठा लिया ...कुछ देर बैठने केबाद जब जाट ने पुलिस वालो की ही दो बीडी पी ली तो उन्होंने उसे छोड़ दिया.... खैर उस दिन हम खुशी खुशी लंचकरके वापस लौट रहे थे की अचानक सामने से एक ठुल्ला दिखा ओर उसने हमे थाम लिया ....मरते क्या न करतेजेब मे हाथ डाला तो ५० का नोट था ....कहाँ से तुडवाते?मैंने उसके हाथ मे दिया ....जाट उसे कुछ देर घूरता रहाफ़िर बोला "पईसी वापस ना करने? तुम्हारा तो २० का रेट है ....पोलिस वाले ने हम दोनों को हड़का कर भगादिया.....तब किसी से उधार मांग कर हमने अगले दो दिन काटे .....
अगले साल हमारी इस सबसे बड़ी समस्या का हल हो गया कॉलेज मे resident मेस मे हम दोनों को एंट्री मिल गयी जिसको ज्यादातर नॉर्थ इंडियन ने चला रखा था ...
लेकिन जाट का i.q गजब का था ओर उसकी याददाश्त गजब की थी ....अक्सर जब हम एक्साम के दिनों मे ऊपरनीचे हो रहे होते जाट आराम से टी.वी पर क्रिकेट मैच देख रहा होता ,उसने गुजराती पढ़ना फौरन सीख लिया ओरअक्सर गुजराती के अखबार बोल बोल के पढता ....तब तक जाट ने दो ही मूवी देखी थी शोले ओर पाकीजा .....मुझेमूवी देखने का बहुत शौक है मैं पूछता .....चलेगा ...गाना कौन सा है ? वो पूछता .फ़िर मना कर देता ....एक बारजिद करके हम लड़के उसे "basic insticnt दिखाने ले गये,जाट १५ मिनुत मे मुझसे मेरी फटफटी की चाभी लेकरबाहर आ गया "अरे यो कोई पिक्चर है ? मुझे याद है जब मैंने उसे पहली बार जगजीत सुनवाया तो वो बोर होकरउठ खड़ा हुआ था ......
तब हमे एक मोहतरमा से इश्क हुआ ओर उन्हें इम्प्रेस करने के लिए हमने एक गाने की तीन दिन तक जमकररिहर्सल की .अक्सर बर्थ डे पार्टी पर हम सब किसी होटल मे मिलते ,खा पीकर वापस आ जाते ...तब हमने प्लानबनाया की कुछ देर बाद लड़के मुझसे गाने की फरमाइश करेंगे ओर फ़िर हम गाना गा कर उन्हें इम्प्रेस करदेगे....धड़कते दिल से उस रोज हम पहुंचे ...पहले २० मिनट बीत गये ....साला किसी को कुछ याद नही रहा ...कोईजिक्र नही कर रहा .....हमने एक दोस्त को इशारा किया वे नजरअंदाज कर गये .....दूसरे को फुसफुसा कर कहागाना ....गाना "....अभी रुक के उसने मुझे समझाया .......कुछ देर ओर फ़िर .....हमने सामने बैठे जाट के पैरमे लात मारी....जाट टेबल के नीचे घुस गये .....फ़िर उन्हें समझ आया .....ओर उन्होंने फरमाइश की ...हमने थोड़ानखरे दिखाये ओर फ़िर हमने रिहर्सल किया हुआ पुरा गाना सुना दिया....वो गाना था "दिए जलते है फूल खिलतेहै......"नमक हराम का गाना ......अगले दस सालो तक वो गाना हमारी लड़को की हर महफ़िल मे हर पार्टी मे बजताओर मेरे यार इसका मजा लेते.....बाद के दिनों मे हम पार्टियों के सिंगर भी हो गये ..
हमारे कॉलेज के annual function मे ओडीटोरियम का उपरी हिस्सा under -graduates के लिए रहता था ओरवाली रात उसकी हवा मे ही इतना नशा होता था की न पीने वाले भी हवा सूंघ सूंघ के बेचारे नशे मेहो जाते थे ,दरअसल ये सालो से चली आ रही परम्परा थी...उस दिन सिगेरेट की इतनी खपत थी की बाद के सालोमे हम लोगो ने ये भी सोचा की क्यों न छत से जलती हुई रस्सी टांग दी जाये क्यूंकि माचिस की बड़ी किल्लत रहतीथी एक बार किसी ने मांगी ओर फ़िर गुम..जाट की केपसिटी बहुत अच्छी थी मैंने आज तक उसे एक या बार ही चढ़ेहुए देखा है....कई लोग होस्टल से दो पैग मर कर चलते थे ....टीचर्स से डरते भी थे अपने साथ एक ऐसा बन्दा रखतेथे जो थोड़ा होश मे हो अगर गेट पर कोई कड़क या सख्त टीचर खड़ा होता तो पहले उसे गुजर जाने देते .....तो एकरोज हमारी क्लास के तीन लोकल बंदो को चढ़ गई ओर बदकिस्मती से जाट उनके साथ थे ...जब आधे घंटे तकजाट नही दिखे तो हम उन्हें ढूंढने निकले .देखा जाट एक साहेब जादे को बाहर ओडी टोरियम की दीवार से टिका रहे है की महाह्श्य गिर न पड़े ...क्या हुआ .....अबे फला बाहर गार्डन मे पड़ा है .....तू उसे देख .....मैं तीसरे को बाथरूमसे लेकर आता हूँ....हम गार्डन मे पहुंचे तो देखा वे महाशय तारो को देख रो रहे है .......क्या हुआ ? साला जाट कहाँ है मैंने उससे कहा था आज मैं उससे पर्पोज़ करके रहूंगा वो मुझे गार्डन मे छोड़ गया की उसे यही लेकर आताहै......हमने दोनों को बारी बारी से मोटर साईकिल पे अपने बीचों बीच बैठाया ओर फ़िर होस्टल के कमरे मे ले जाकर छोडा ....इन सबमे ३० मिनुट गुजर गये ...मैं ओर जाट सुस्ताने को एक सुट्टा मार ही रहे थे की जाट बोला "अबे मोंटू को तो भूल ही गये."....वाकई हम भूल ही गये थे भाग कर वह पहुंचे तो मोंटू अभी भी दीवार से टिके खड़े थे.
जाट दूसरे दोस्तो की तरह "दिल चाहता है "देखकर फोन नही करता ,न कभी देर रात पीने के बाद उसका फोन आता पर .... वो ओर।मैं साल मे दो बार तो मिलते ही है...... आज जाट इतना कमाता है की मुझसे इन्कम टैक्सबचाने के तरीके पूछता है ...उसके पास सारे लेटेस्ट गदेट्स है । उसके पास बड़ी गाड़ी है ....दो खूबसूरत बच्चे है... उसकी गाड़ी मे जगजीत की सी डी बजती है.....साल मे एक बार छुट्टी मनाने विदेश जाता है ओर जब कभी मेरामन बहुत उदास हो जाता है मैं ५ घंटे की ड्राइव करके हरियाणा पहुँच जाता हूँ...हमारी बीवीया हमसे नाराज रहती हैक्यूंकि हम दोनों जब मिलते है तो घंटो रात भर पीकर जग कर बतियाते है ....आज से ७ साल पहले जब मैंने pratice शुरू ही की थी तब अचानक किसी लाइट के default की वजह से मेरी एक लेसर मशीन को जबरदस्तनुकसान हुआ तब जेब मे इतने पैसे भी नही थे की दूसरी लूँ ,परेशान हालत मे मैंने जाट को फोन लगाया ,वो मुझसे२ साल पहले प्राइवेट प्रक्टिस मे आ गया था ...परेशां मत हो इन्सुरेंस वालो को फोन करना ....नही बात बने तो शाम को मुझे बताना ....मैं पैसे लेकर आ जाउन्गा ...ये पोस्ट लिखते लिखते सोच रहा हूँ उसे फोन कर लूँ..... .. . ... ......." ..... musical nights ?...... " ......